Tuesday, 3 March 2015

मेरी तरह तेरा दिल बेक़रार है के नहीं


बेतरह पागलपन
तुम्हारे होने से इन शब्दों ने अर्थ खो दिए है ,, अब मेरे लिए ये शब्द नहीं होते इनमे तुम होती हो , तुम्हारी परछाई , तुम्हारी महक , तुम्हारी बेबाकी ,लापरवाही , बेतरह महोब्बत , जानते हुए भी डूबना ,रह गया है मेरे भीतर ,  तुम्हारे लिए दुनिया एक्सिस्ट नहीं करती ना  ,, कितना मुश्किल है तुम्हारी तरह होना ,यूँ  मेट्रो में सिटी बजाना , छोटी छोटी चीजो को तलाशना और उन्हें जीवन देना,  इतना डूब कर जिंदगी जीना ,, जान ले लोगी बे तुम , और ये तीन रोज इश्क़ कतई नहीं है ,, मै बहुत गैरजरुरी लिखता हु , फिर बोलता हु क्या फर्क पड़ता है, तुम बहुत कुछ छोड़ गयी हो , जिसे कोई भर नहीं सकता , तुम्हारा यूँ खुद को लूटाना आअह ,,, बैठ गया है , सच मैंने बहुत बहुत इकठ्ठा कर लिए है तुम्हे इतनी जल्दी में बिना सोचे जो मिला सब , किसी को लूटने की तरह, जैसे बचपन में हम किसी मेहमान के जाने पर नमकीन बिस्कुट से अपनी जेबे भरते थे , दिल की जेबो में भर लिए है ,, खचाखच ,
मेरे हिस्से का बहुत कुछ रह गया है , तुम्हारे लिए , मिलेंगे किसी खोये हुए शहर में , खूब सारे  खतो के साथ , गुलाबो के साथ , मिलकर भटकेंगे , लोगो को तलाशेगें
जियो लड़की , और हम तुम्हे पकड़ लेंगे तुम बेफिक्र रहो , दुनिया बहुत छोटी है , 

Wednesday, 18 February 2015

वो लिखता है चिट्ठी पर जिंदगी

उसे ठहरना है , नये रास्ते के लिए , उसने उसके लिए जानां नाम बुना है , उसका जाना लिखना उसकी आत्मा को छिलता हुआ उसे पवित्र करता है, उसने पहली बार जाना की जहाँ वो अब तक धुँए को ले जाने की तमाम कोशिशें किया करता था, वहाँ तक सिर्फ उसके शब्द पहुँचते है, भीतर गहरे तक उतरते है , अब उसने इस तरह की कोशिशें बंद कर दी है , बहुत शोर , भीड़, लोगो के बीच वो खुद को तन्हा पता है, उसके पास जाना चाहता है, पानी के लिए तरसते रेगिस्तान मे पांच दिन से भटके मुसाफिर की तरह , हर मुलाकात के बाद अगली मुलाकात की तेज इच्छा की तरह , तुम्हे गले मिलने की तरह , शायद कुछ ऐसा है हाँ शायद , हालांकि अब वो शायद जैसे और भी जैसे शब्दो से नफरत करने लगा था , उस रात उसने कहा था वह उस से प्रेम करती है और उसने कहा था की वह भी , भी प्रेम करता है जबकि उसे कहना था वह प्रेम करता है , भी शब्द ने उसकी उस पूरी रात का कत्ल किया था, उसे बीच के रास्ते पर नहीं चलना था, उसने पाश की नई किताब खरीदी है बीच का रास्ता नहीं होता ,उस रात उसने पहली द्फा उसके होंठो को चूमा था, उसके होंठो के निशान उसकी आत्मा पर उतर आये थे, वह बहुत लोगो को , चीजो को नकारना चाहता है, नफरत करना चाहता है, उसे सिर्फ उसका होना है उसके बिना वह नफरत करने लगे प्रेम से , अंधरे से शहर से लोगो से कविताओं से सिगरेट से कम्यूनिस्ट लोगो से , उसे उसके कंधे पर सर रख कर तुम होना है , उसे पहनने है मोजे इत्मिनान से गले मिलना है पत्थर होना है और मर जाना है , उसे लगता है उसकी आत्मा तक का रास्ता उसकी आंखो से होकर जाता है, वह उसके लिये निशब्द होता है , उसके लिए बेतरह टाइप वाला लिखना चाहता है जो सिर्फ उसके लिए हो , उसे बहुत कुछ अधूरा छोड़ना है वी शुड और और वी शुड नॉट के दिन कि तरह , उनके बीच वायदों जैसे तन्ग शब्दों ने अपने अर्थ खो दिये है बहुत छोटे हो गये है , तन्ग लिखा नहीं जा रहा सच मे कितना तन्ग है , उन्हे पता है वो इन सब से कितना अलग है , वो लड़का लिखता है क्या फर्क पड़ता है हालांकि उसे बहुत फर्क पड़ता है , कुछ ऐसा ही उसे फिलहाल इस बारे मे बात नहीं करनी या वो इस बारे सोचना नहीं चाहता . सुनो इस बार मिलो तो कस कर गले लगा लेना