Monday 7 March 2016

मैं, तुम

मैं कहता हूं, प्रेम
तुम कहती हो, दिन बुरा था, सिगरेट चाहिए
मैं कहता हूं, जिंदगी
तुम कहती हो, कल कॉलेज जल्दी जाना है
मैं कहता हूं, मौसम
तुम कहती हो, बहुत पढ़ना है
मैं जानता हूं, तुम्हारा महकना
तुम कहती हो, प्रदर्शन में बहुत भीड थी
तुमनें छोटी बिंदी लगाई है
तुम कहती हो, नौकरी मिली
मैं कहता हूं, तुम्हारी आंखें
तुम कहती हो, यहां कॉफी अच्छी मिलती है
मैं कहता हूं, तुम्हारे हाथ
तुम कहती हो, जन्मदिन पर क्या खरीदना चाहिए
मैं कहता हूं- तुम
तुम कहती हो बकवास

.....इस बीच सिगरेट बीच पसरे मौन, तैरते खालीपन को भरने का काम करती है महज. उससे ज्यादा कुछ नहीं
गले मिलना, चूमना, लौटना


1 comment:

  1. एक अलक्षित सी उदासी
    जाने कहाँ से उतर आई

    पर इस भागमभाग में उदासी की तह तक कौन झांकना चाहेगा
    कहीं चीख पुकार मचे तो भले दो कान मिल जाए सुनने वाले
    और 2 को 22 सुनाने वाले।

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